Wednesday, August 1, 2012

फिफ्टी शेड्स ऑफ़ ग्रे



अक्सर मुझ पर लगते आरोपों में एक ये भी है कि -  ' तुम मज़ाक बनाते हो। ' 


परन्तु मुझे इसका कोई शौक नहीं है। दूर-दूर तक भी नहीं। सीधी सपाट बात बिना किसी लाग लपेट के कह देने से मैं बड़ी आसानी से इस केटेगरी में अपना नाम दर्ज करवा देती हूँ। 

ई एल जेम्स द्वारा लिखी किताब 'फिफ्टी शेड्स ऑफ़ ग्रे' की करोड़ों प्रतियाँ बिक चुकी हैं। इस किताब के बारे में सोचती हूँ तो एक बात तो तय हो जाती है। यदि ऐसी किताबें जीवन का साल्ट हैं तो उत्सुकता जीवन का ब्लैक पैपर  है। ज़िंदगी को चटपटा बना देती है। इसी उत्सुकता के चलते ही ऐसी किताबें बेस्ट सैलर बन जातीं हैं। एक बार किसी बस्तु विशेष या अन्य किसी के बारे में उत्सुकता बन जाये या जान पाने का लोभ हो जाये तब - क्यूँ, क्या, कब कैसे, फिर...उसके बाद.....का अंतहीन रोमांचक सफ़र शुरू हो जाता है। 

उत्सुकता वश ये किताब मैं भी पढना चाहती हूँ। देखूं तो ऐसा क्या लिखा है कि करोड़ों लोगों ने इसके पीछे दौड़ लगा रखी है। वैसे जेम्स इसकी हर खरीद पर मंद-मंद मुस्कुराती जरूर होगी.......

 अब तक रोज सुबह सबसे पहले अखबार में ख़बरें पढ़ती थी.....परन्तु आजकल सबसे पहले अपना राशिफल  पढ़ती हूँ। जिसमें हफ्ते में पांच दिन लिखा होता है। 'वाणी पर संयम रखें' 


वैसे तो मित्रजन मुझे अल्प-भाषी की ज़मात में खड़ा करते हैं.....अब अगर इसमें भी कटौती करनी पड़ी तब तो बेहतर यही होगा कि किसी से बात ना की जाये। बस ब्लॉग पर अपने खयालात लिखते जाओ और मन को अभिव्यक्त करते जाओ.....तब तक जब तक की राशिफल में ये लिखा नहीं आ जाता। 



'ख्यालों की अभिव्यक्ति में संयम बरतें........'


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