Friday, October 20, 2017

Monday, September 11, 2017

इतिहास में दफ़्न होता - भवाली सेनिटोरियम नैनीताल ( उत्तराखंड )

नैनीताल से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह सेनिटोरियम कुछ वर्ष पूर्व तक भी बेहद मशहूर था। कहा जाता था कि यहाँ पर स्थित चीड़ के वृक्षों की बहुतायत से यहाँ की आबो -हवा टीबी रोगी के फेफड़ों के लिए उत्तम होती है। 
 225  एकड़ में फैला, देश - विदेश में ख्याति प्राप्त भवाली का यह ट्यूबरक्लोसिस का ( टीबी - क्षय रोग ) सेनिटोरियम सन -1912 में किंग जॉर्ज एडवर्ड VII द्वारा बनवाया गया था। यह रामपुर के नवाबों की ज़मीन पर बना था।
कभी इसमें 378 बेड थे। जिनमें से अब केवल 100 के करीब ही रोगियों को दिए जातें हैं। 
पंडित जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू जी ने भी यहाँ पर ( 10 मार्च 1935 - 15 मई 1935 ) करीब दो माह रह कर स्वास्थ्य लाभ किया था। बाद में 28 फरवरी 1936 में 37 वर्ष की अवस्था में स्विट्ज़रलैंड के एक सेनिटोरियम में उनका देहावसान हुआ। 
मशीने खस्ता हाल, साधन समाप्ति के कगार पर। सरकारी फंड के आभाव में अब इसकी जीर्ण हालत देख कर इसकी दुर्दशा का अनुमान लगाया जा सकता है। 
 अब नई खोज और औषधियों से इस क्षय रोग पर नियंत्रण आसान हो गया है। किन्तु अब भी तीन महिला क्षय रोगी वहां के महिला वार्ड में थीं। उनकी अपनी कहानियां थीं। पुरुष वार्ड में कुछ पुरुष क्षय रोगी भी थे। 
वहीं पर काम करने वाली करीब पचास की वय की शांति जी से बात की तो वे बेहद मायूसी के साथ बोलीं। "मेरी माँ ने यहीं काम किया था। मैं भी यहीं पैदा हुयी, बड़ी हुयी अब यहीं सेवारत हूँ।" उनके पास गुज़रे वक्त की ढेरों अच्छी - बुरी कहानियां थीं। न जाने कितने रोगी स्वस्थ्य होकर गए और कितने ही हमेशा के लिए यही की जमीन में समां गए। 
 इस सीलन से भरी खस्ताहाल लाइब्रेरी में बहुत सी अंग्रेज़ी और हिंदी की पुस्तकें उस समय की यादें समेटे हुए थीं। कुछ जो पढ़ने के शौक़ीन रोगी होते हैं वे पुस्तकें ले जाकर पढ़ते थे और वर्तमान में भी पढ़ते हैं। 
मरीजों के लिए सन 1937 का बना हुआ मनोरंजन केंद्र भी है। जिसमें रोगियों को समय -समय पर चलचित्र दिखाए जाते थे एवं अन्य कार्यक्रम भी होते थे। 

जल्द यह सेनिटोरियम भीमताल में स्थित ' गेठिया ' नामक स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। सरकार की योजनाएं और बड़ी - बड़ी बातें सिर्फ हवाओं में तैरती रहतीं हैं। यहाँ पर क्या होगा ? कैसे होगा ? यह आने वाला समय ही बताएगा।

Thursday, August 17, 2017

तू न चलेगा तो चल देंगी राहें


इस 
दुनिया में
 जितने तरह के नाम है 
उतने ही तरह के निराले इंसान  
जैसे 
इस धरा में 
पुष्पित हुए हैं पुष्प 
नाना प्रजाति नाना प्रकार के 
उनके 
रंग अलग हैं 
सुवास भी अलग सी 
आकार अलग प्रकार अलग 
गोया 
एक आंगन में 
एक ही तरह के संस्कार 
एक सा व्यवहार मिलने पर भी  
कुछ 
बन जातें हैं 
अच्छे विचारों के संवाहक 
कोई संसार की हर बात से ख़फ़ा 
कोई 
हो जाता है 
मीठा मधु फूलों सा प्यारा 
कोई नीम कड़वा गुलाब का कांटा 
चंद 
दुनिया से दुखी 
हर बात हालात से नाराज़
कुछ रहतें हैं हर हाल आनंदित 
हमें 
खूब रास आती है 
कड़वाहट नीम करेले की 
नागफनी से तो बेइंतहा मोहोब्बत है ही 



Sunday, August 6, 2017

बुरा जो देखन मैं चला, मुझसे बुरा न कोई


"दूसरों के गुणों की तरफ देखो और अपने दोषों की तरफ।" माँ हमेशा कहती है।

"तो माँ, कुल जमा ये कि सारी दुनिया बेहद अच्छी और मैं ??" माँ हंस देती है।  इस फ़लसफ़े से तो मैं हमेशा अपने आप को दोषों से परिपूर्ण ही देखती रहूं।

" माँ केवल हंस कर बात मत टालो। क्या सच में मुझे अपने आप को इसी नज़र से देखना चाहिए? आजकल इस कलयुग में कहते हैं अपने आप से प्यार करो अपनी इज़्ज़त करो तभी दुनिया का रुख भी तुम्हारे प्रति अच्छा रहेगा ? ऐसा। "

" हे ईश्वर कौन कहता है ऐसा..?"  माँ असमंजस में दिखी।

" सब कहतें हैं मदरलैंड। "

"कौन सब ?"

" माँ तुम सतयुग की बात कर रहे हो। आजकल अपने को गुणवान और दूसरों को गलत और बुरा समझना चाहिए। ऐसा रिवाज़ है, और वो ही ठीक है। "

"हाय.. ऐसा कब से हो गया ? ऐसा कभी भी नहीं होता। पता नहीं कहाँ सुनके आती है ऐसा गन्दा।  छी...बेकार हुयी तू सच्ची।  माँ स्तब्ध।

"कतई बेकार हुए यार माँ मैं।  सभी कहते हैं। "



Monday, July 31, 2017

कलयुग की भग्वद गीता ( व्हाट्सऐप से प्राप्त ज्ञान )


हे पार्थ,  ||  तुम पिछले मेसेज का पश्चाताप मत करो ||  || तुम अगले मेसेज की चिंता भी मत करो ||  || बस अपने करंट मेसेज से ही प्रसन्न रहो ||  

|| तुम जब नहीं थे, तब भी ये मेसेजो का चलन रहा था ||  || तुम जब नहीं होगे, तब भी ये मेसेजो का चलन चलता रहेगा ||  जो मेसेज आज तुम्हारा है, कल किसी और का था ||  वो कल किसी और का होगा ||  तुम इसे अपना समझ कर मगन हो रहे हो ||  यही तुम्हारे समस्त दुखों का कारण है ||  

बहुत बढ़िया   लाइक   धन्यवाद  जैसे शब्द अपने मन से निकाल दो || निष्काम भाव से मैसेज करो..फिर देखो तुम इस व्हाट्सऐप रूपि भवसागर में रहते हुए भी इस के समस्त कुप्रभावों से दूर रह कर स्वर्ग लोक को प्राप्त होगे  ||  राधे -राधे। 

जन्म लिया है तो सिर्फ साँसे मत लीजिये, जीने का शौक भी रखिये...कुछ रिश्ते भगवान बनाता है.... और कुछ रिश्ते whatsapp .



ॐ शांति शांति शांति:
॥शुभम् भवतु॥




Tuesday, July 4, 2017

मेरा नाम करेगा रोशन जग में मेरा राज दुलारा



"अजी सुनते हो...कहाँ चले गए ?" 

" पंछी उठ गए। दुनिया उठ कर कहाँ से कहाँ पहुँच गयी। और एक ये महाशय हैं। सुबह के दस बज गए अभी तक सोता पड़ रहा है। बेटा जी, ऐसे नाम रोशन करोगे माँ -बाप का..हम्म।"

" डैड फिर आ गए आप...माँ यार...समझाओ अपने पति को। कमसकम सन्डे को तो सोने दो....रात देर तक पढ़ रहा था मैं।" करवट बदल कर तकिया के नीचे चेहरा छुपा कर वह फिर सो गया। 

" हमने तो कभी पढ़ा ही नहीं। घास काट कर क्लास वन अफ़सर बन गए। घर भर के कितने काम कर देते थे सुबह मुंह अँधेरे उठ कर...ये आजकल की औलादें। अपने से बड़ों की इज़्ज़त करना जैसे सीखा ही नहीं कभी।" 

" केवल बड़े हो इसलिए इज़्ज़त करें ? और.. और बताइये किस लिए इज़्ज़त करें ? सिवाय ताने देने के आप करतें ही क्या हैं ? हम ऐसे... तू ऐसा...फलां का बेटा इतना काबिल.. तू इतना नालायक...शर्मा अंकल ने अपने बेटे को बी एम डब्ल्यू दी है इस बर्थ डे पर। अब ?....आप क्या देंगे मुझे ? ख़ामख़्वाह ...डैड आप रहने दो...प्लीज़। खाली सुबह -सुबह..." 

" अजी सुनते हो। पड़े रहने दो नालायक को। आ जाओ। चाय ठंडी हो रही है।" पत्नी न मालूम किसे बचाने का प्रयास करती है। फटकार खाते जवान, धैर्यहीन बेटे को ? या फिर बेटे से दो टूक जवाब सुनते, शर्मिंदगी उठाते पति को। 

Tuesday, June 27, 2017

नंदादेवी के घर में महादेवी - मीरा कुटीर - रामगढ़, नैनीताल ( उत्तराखंड )

विस्तृत नभ का कोई कोना,
मेरा न कभी अपना होना,
परिचय इतना इतिहास यही 
उमड़ी कल थी मिट आज चली।  
मैं नीर भरी दुःख की बदली।




    





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