Thursday, April 5, 2018

उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसे रामगढ़ ( नैनीताल ) में कवयित्री महादेवी वर्मा की मीरा कुटीर के प्रांगण को गुलज़ार करती दो दिवसीय गोष्ठी - स्त्री और लेखन'

"पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले / विश्व का क्रंदन भुला देगी / मधुप की मधुर गुनगुन।"

कुछ ऐसी ही मधुर गुनगुन से २६ एवं २७ मार्च २०१८ को कई दिग्गज साहित्यकारों ने नैनीताल की विहंगम पहाड़ियों को संगीतमय किया। उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसे रामगढ़ ( नैनीताल ) में स्थित कवयित्री महादेवी वर्मा की मीरा कुटीर के प्रांगण ( शैलेश मटियानी पुस्तकालय के हाल में ) को गुलज़ार करती दो दिवसीय गोष्ठी - स्त्री और लेखन' समपन्न हुयी। यह गोष्ठी महादेवी के १११ वे जन्मदिन पर 'महादेवी सृजन पीठ' कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की गई ।
 सुश्री मृदुला गर्ग, श्री मंगलेश डबराल, श्री सतीश जायसवाल, महादेवी सृजन पीठ के निदेशक प्रो देव सिंह पोखरिया, संगोष्ठी समन्वयक श्री मोहन सिंह रावत एवं कई अन्य साहित्यकारों के सानिध्य में उनके उत्तम विचारों को आत्मसात करते वे अद्भुत पल थे। महादेवी की प्रिय शिष्या डॉ यास्मीन सुल्ताना ने उनके साथ व्यतीत अपने सुंदर पलों को संस्मरण द्वारा साझा किये। गीता गैरोला दी, श्री मुकेश नौटियाल, श्री सुनील भट्ट , श्री कुंवर रविंद्र, डॉ सिद्धेश्वर, डॉ शशांक, डॉ अनिल, मेरी बाल सखा डॉ नूतन गैरोला एवं कई अन्य साहित्यकारों ने आलेख एवं कविताओं में समाहित भावों से सभी को मंत्रमुग्ध किया।




अल्पभाषी, विनम्र एवं कुशल संचालक श्री मोहन सिंह रावत जी को हार्दिक धन्यवाद एवं आभार जिनके आमंत्रण पर मैं गोष्ठी में सम्मिलित हुयी। सौम्य प्रो देव सिंह पोखरिया जी का भी हार्दिक धन्यवाद एवं आभार जिन्होंने मुझे कविताओं के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता करने का अवसर प्रदान किया। अन्य सभी मित्रों को साधुवाद, अभिनन्दन।
गोष्ठी के दूसरे दिन सुस्वादु भोजन के उपरांत प्रसन्नता से सराबोर और परिचय का आदान -प्रदान करते हुए सभी विदा हुए अगले वर्ष फिर से एकत्रित होने के लिए।  

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