उस दिन सूरज की किरणों के जगाने से पहले ही नींद उचट गयी थी, वातावरण में पिछली रात की बारिश की ठंडक समाई हुयी थी. चलते चले जाने का मन था बहुत दूर उन सर्पिलाकार सड़कों पर जो अपने उबड़ खाबड़ रास्तों से जंगल को घेरे रहती हैं, टुकड़े टुकड़े स्म्रतियों को जोड़ते - तोड़ते कभी- कभी निरुद्देश्य चलते रहने में भी बहुत आनंद आता है........
तब समय मेरी मुट्ठी में था मन प्रसन्न था, और सोच स्वतंत्र थी, ज़िंदगी इतनी रहम दिल भी हो जायेगी कभी सोचा नहीं था....
यहाँ गौरय्या बहुत दिखती है मेरी बाल सखा ..बहुत बातें करती थी में इनसे..... आज भी इनसे एकालाप ठीक रहा, मुझे टुकुर टुकुर देखती जैसे सब कुछ समझ रही हों....शायद समझ ही रही थी तभी तो देर तक वो बिना डरे सामने बैठी रही.....
फूलों और जंगली घासों की मिली जुली खुश्बू से महकती मैं अपनी कल्पनाओं में सुन्दर रंग भरती रही, जानती हूँ ज़िंदगी कल्पनाओं के सहारे नहीं चलती.....यथार्थ से रूबरू तो होना ही पड़ता है .......घटनाओं और अनुभवों से सराबोर ये ज़िंदगी अब और भी अच्छी लगने लगी है पगडंडियों पर नज़र रख कर चलने वाली मैं आज सर उठा कर चीड़ के ऊंचे, लम्बे पेड़ों के पीछे से झांकते हुवे साफ़, नीले आकाश को देखती हुई चल रही थी.....मनचाहा प्राप्त होने पर आत्मविश्वास हमेशा सर क्यू ऊंचा कर लेता है ....? इस भंगिमा से मैं हमेशा कतराती हूँ, चुपचाप सर नीचे कर के चलने से लगता है दुनिया से बेखबर हम पूरी तरह अपने ही साथ हैं, अपना साथ सबसे सुन्दर साथ है.........ना हम पर ना हमारे विचारों पर ..कहीं पर किसी का कोई हस्तक्षेप नहीं......
अचानक एक बड़े से नुकीले पत्थर से टकराती हूँ ......लगभग गिरती हुई .......सहारे को तलाशते हाथों में पेड़ से झूलती शाखाएं आ जाती हैं ......सभी की मिली जुली साजिश थी मुझे खुश रखने की...झींगुरों की आती जाती आवाजों के साथ... टूटी हुई सोच की कड़ी फिर जुड़ जाती है.
ज़िंदगी को पलट कर देखती हूँ ...ज़िंदगी जीने के लिए बहुत थोड़े से लोगों की जरुरत पड़ती है......और उन के अहसासों के साथ भी समय सुन्दर बीतता रहता है ......
अचानक सर के ऊपर से एक चील ज़ोर की आवाज़ करती हुयी निकली, सहम कर देखती हूँ यदा कदा कुछ सर उठाते सवालों के हल खोजते बहुत दूर निकल आयी हूँ ....सूरज का ताप भी बढ़ता ही जा रहा था..... अब वापस घर की ओर जाने लगती हूँ ........फिर वही रास्ते, जीवन के अलग-अलग मोड़ों पर मिलते दुख-सुख का हिसाब- किताब.......जीवन की गणित भी कितनी मजेदार होती है......कुछ सवाल पल भर में ही हल हो जाते हैं, ओर कुछ हमारे साथ ही अपनी ज़िंदगी का सफ़र भी तय करते हैं .......
