Tuesday, March 22, 2016

पतझड़ सावन बसंत बहार ( Whispering Spring )


आज काम करने को मन नहीं है। 

तो?

तुम भी अपने ऑफिस मत जाओ। 

फिर ?

चलो जंगल की तरफ चलते हैं...वहां पर जी भर के बसंत  देखेंगे। फूलों की होली खेलेंगे। चलें अब ....? 

सोच रहा हूँ... आज नहीं फिर चलेंगे। वीक एंड पर। 

तुम बोर हो , महा बोर....

"ये शहर भागते रहतें हैं, इन्हें फुर्सत नहीं होती बसंत देखने की, इसलिए यहाँ बसंत नहीं खिलता ....."


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