Saturday, February 13, 2016

ये जो महोब्बत है ये उनका है काम


एक उम्र आती है, प्रेम और कशिश से सराबोर। सभी की आती है, हमारी भी आई थी । जब सब कुछ सुन्दर और नया - नया लगता है। लगता है हम भी खूबसूरत हो गए और सारा संसार भी सुन्दर। तब भीतर प्रेम का सागर हिलोरे मारने लगता है। अन्य सहेलियां स्कूल के दिनों से ही इश्क - मोहोब्बत की बातें करने लगीं थीं। उनकी बातें सुनती और उनको लिखे गए प्रेम -पत्र पढ़ती हुई मैं हैरानी से दिमाग पर बल डालती और अपने प्रेम के बारे में सोचती थी। 'ज़माने पर ऐसा क्या जुलम हुआ हमारे हाथों? ऐसे हालात....' मेरी सहेलियों के अलावा मुझ पर किसी को प्रेम नहीं आया। किसी ने मुझे कभी प्रेम पत्र भी नहीं लिखा। गलती से भी नहीं। परन्तु जब भीतर कोई अहसास ही नहीं थे तो मुझे कभी मायूसी भी नहीं हुई। शानदार स्नेहयुक्त बचपना और समृद्ध जीवन था इसलिए अन्य बातों में मशगूल रही। 

सीखते, हँसते - खिलखिलाते जब कॉलेज पहुँचे मेरे प्रेम के अहसास ने तब अंगड़ाई ली। सर उठा कर प्रेम को तलाशा तो जाकर नज़र टिक गई सजीले से नायक सर पर। खूब दिवास्वप्न देखे, अकेले अकेले। सर अपनी होनहार विद्यार्थी से खुश और मैंने उन्हें लेकर संजोई अन्य खुशफहमियां। अपने दिल की बातें बताने का सलीका मुझे तब भी नहीं था और आज तक भी नहीं आ सका। करीब छह महीने बाद गर्मी की छुट्टियों में कॉलेज बंद हुआ। गुलाब की पत्तियां तोड़ते हुए ' love me , love me not '  करते हुए और अपने को दर्पण में निहारते हुए आत्ममुग्धता से ग्रसित रही। छुटियाँ समाप्त हुई तो सुनने में आया नायक सर अपनी लम्बी चोटी वाली सुन्दर नई -नवेली बंगालन पत्नी के साथ लौटे हैं। ये क्या हुआ? मेरे प्रेम की शुरुआत होने से पहले ही अंत। दिल के अरमाँ आँसुओं के साथ तो नहीं परन्तु बह जरूर गए थे पता नहीं कहाँ। 

इसके बाद अमूमन घूमती -फिरती सी बातें आतीं रहतीं थी। "वो तेरे बारे में पूछ रहा था / वो कह रहा था तुझसे अति प्रेम करने लगा है / वो तुझसे बातें करना चाहता है, आदि। मैं ऐसी बातों से बिदक जाती थी। और जवाब देती थी "तुझसे कहा है ऐसा , तू ही कर ले उससे मोहोब्बत.....हट्ट....बेकार लोग। सीधे बात तक करने की हिम्मत नहीं प्रेम क्या खाक करेंगे।" 

मेरे जीवन में कभी किसी ने न तो सीधे ' तने प्रेम करू छू कहा, न आमे तमाके भालो वाशी' कहा और न ही कभी कोई प्रेम पत्र आया। एक भी नहीं -आधा भी नहीं। हद है सच्ची। 

कोई नी....बिना इश्क-मोहब्बत , बिना प्रेम- पत्र और बिना गिला-शिकवे वाला सफर भी कमाल का चल रहा है। 

सभी के जीवन में खूब प्रेम बरसे / खूब सच्चे वाले इश्क़ -महोब्बत के फूल खिलें। प्रेम बगिया महकें और उसके साथ सभी महकें। 

प्रेम चतुर्दशी की बहुत शुभकामनाएं !





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