Thursday, October 29, 2015

आपके अनुरोध से मैं ये गीत सुनाता हूँ


​कुछ लोग मज़ेदार, शानदार होते है। उनके अपने हाथ में कुछ नहीं होता। वे अपने मन के हाथों बेबस लोग होते हैं। 

मन हुआ तो काम किया न हुआ तो आलस। मन हुआ तो खूब बतिया लिए न हुआ तो चुप्पी। कमाल के लोग। मुझे ऐसे व्यक्तियों को देख कर हैरत होती है। सोचती हूँ ये लोग जी कैसे पाते होंगे? एक कहता है 'मैं परेशान था इसलिए.....' तो क्या उनके अलावा दुनिया में सभी सुखी होते हैं?  

दूसरे कहते हैं 'मेरा मन ठीक नहीं था इसलिए.....' अब भाई क्या गारंटी है कि जब तुम्हारा मन ठीक हो तभी दूसरे का भी ठीक हो? 

कुछ लोग और महान होते हैं। उन्हें स्वयं के बारे में हमेशा उलझन रहती है परन्तु दूसरा क्या सोचता है इस बात को समझ पाने में वे पारंगत होते हैं। उनका कहना होता है। 'मैंने सोचा कि आप ऐसा सोच रहे होंगे....मैंने सोचा।' सोचते रहो....हो ली ऐसे मित्रता और निभ लिए उनके रिश्ते। ऊपर से रोना इस बात का कि वे अकेले छोड़ दिए गए।  

छोटी से ज़िंदगी और खूब सारा मूड स्विंग। ज़िंदगी हो तो ऐसी..... 

अब ऐसे लोगों को अकेलापन नहीं होगा तो क्या उनके इर्द -गिर्द मज़मा लगेगा?

ऐसे लोग अपने आप को बेकार टाईप का समझें....बस, हम तो बता दिए। 

मानना न मानना फिर आप लोगों के हाथ।  बेबस , बेकार लोगों के हाथ।  


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