Tuesday, August 11, 2015

बने रहें खूब बोलने वाले


क्या हुआ है? कुछ बोलो तो सही। 

कुछ नहीं......कुछ भी नहीं।   

तो फिर ये चेहरा क्यों बिगाड़ रखा है? 

ऐसा ही है, बिगड़ा हुआ। 

उपरवाले ने अच्छा -खासा दिया है। मालूम नहीं इतनी छोटी सी ज़िंदगी में ये मूड ऑफ करके जीने में क्या आनंद है?

सबकी अपनी आदतें होतीं हैं। जरूरी है सब तुम्हारी तरह बकबक करे ?

हम जैसे बकाबकी करने वाले लोग न हों न, तो संसार में मातम छा जाए। 

जरूर....तुम जैसे लोगों के ही भरोसे चल रही है ये दुनिया। 

वोई तो....इसी बात पर एक स्माईल प्लीज़....

स्ट्यूपिड.....  :))

आइस पिघल गई....चल अब आइस टी पीतें हैं। माय परेशान आत्मा....  

:)))))))))) 

दैट्स लाइक माय गुड बेबी...


( साभार - ऑक्स्फ़ोर्ड चाय बार से )  

  

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