Monday, March 2, 2015

पहाड़ी औरत


 
" क्या लिखा है ये तुमने ? पहाड़ों का कष्टों भरा जीवन और उस पर वहां की औरत के दर्द की इंतहा....."

" पहाड़ों का जीवन वैसे ही आसान नहीं उस पर वहां की औरतों की पहाड़ सी जिंदगी......सोच कर ही मेरी रूह कांपती है।" 

" सभी जगह तो हैं पहाड़, कहां नहीं हैं? काम के पहाड़, दुःख के पहाड़, कष्टों के पहाड़, शिकायतों के पहाड़......ये जिंदगी ही पहाड़ जैसी है ?"

" हो सकता है परन्तु इन पहाड़ों में और पहाड़ी औरत की पहाड़ सी ज़िंदगी में बहुत अंतर है।"

" कितना भी हो ऐसा लिख देना…… ?"

" पहाड़ की औरत पहाड़ों की ज़िंदगी जीते -जीती पहाड़ जैसी ही कठिन और मजबूत हो जाती है। ऐसा नहीं, कि जरा सा कष्ट आया, झट आँखें भिगा लीं। कोई नहीं देखता उनके आंसू। दीखता है तो बस काम और काम..... कितना काम किया।"

" करीब से देखा है तुमने उन औरतों के जीवन को ?"

" बहुत करीब से"

" चलो ..... एक कहानी ये भी मुकम्मल हुई "



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