Wednesday, December 3, 2014

किसी पत्थर की मूरत से मोहोब्बत का इरादा है


"मेरा ना ,  पत्थर की मूरत से मोहोब्बत का इरादा है "

"पत्थरों के पास न दिल न दीमाग.......क्या करोगे उन के साथ ?"

"कमसकम तुमसे अच्छे होंगे। तुम्हारे पास दिमाग हो गया बड़ा, जो तुम ज्यादा ही लगा देती हो और दिल नदारत..... "

"हाँ तो……ऐसा ही होता है। दिल -विल प्यार -वार मैं क्या जानूँ रे........नायिका ने ऐसे ही तो नहीं गाया था।"

"तुम पागल हो "

"ह्म्म....ऐसा करते हैं हम दो शरीर एक दिल हो जाते हैं।"

"दिल के खेल को इतने हलके में न लो जान "

"दिल खाली -खाली बर्तन है........ इसके आगे बोलो "

"और मैं माटी का एक पुतला हूँ, कल मिट्टी में मिल जाऊँगा,  पत्थर बन जाऊँगा "

" तुम चुप बैठोगे "

" अरे फिर मिट्टी से पत्थर की मूरत बन जाऊँगा " 

"ठीक .... मैं उस मिट्टी में कैक्टस उगाऊँगी, तुम्हारी इस तरह की काँटेदार बातों की वजह से उसमे सिर्फ कैक्टस ही उग सकता है "

"और तुम्हे कैक्टस से बेइंतहा प्यार है "

"है तो "

"और तुम्हें भी तो पत्थर की मूरत से मोहोब्बत है "

"वो भी है......हाँ है तो सही……बरोबर !!"

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