Monday, July 28, 2014

खुशियों की कोशिश में हर दिन दर्द झमेला है


' कोशिश करेंगे। कोशिश पर तो दुनिया कायम है। यही एक आशा है, एक उम्मीद है।

'अंग्रेज भी कह गए हैं -  I will try my best '

'ख़ाक बेस्ट………… '

मुझे तो ऐसा कहने वाले सब बहाने करते नज़र आते हैं। जिसने भी ये कहा। समझो काम होने वाला नहीं है। वादा खिलाफी होगी पक्का है। हर रोज़ सुबह ब्रश करते , नहाते -धोते , खाते-बनाते तब कोई नहीं कहता। ये सब करने की कोशिश करेंगे। ये सब बस करना ही होता है। हर हाल में। 

यही दो विकल्प ठीक रहते हैं। हम काम या तो करेंगे या फिर नहीं करेंगे। ये ट्राई - फ्राई कुछ नहीं होता। 

कुछ लोग इस वाक्य का बहुत ही ज्यादा प्रयोग करते हैं। सब एक्सक्यूसाईटिस रोग से ग्रस्त लोग होते हैं। कभी - कभी ये रोग मुझे भी लग जाता है। जब मेरा मन नहीं करता वो काम विशेष करने को। मैं सीधे कह देती हूँ नहीं कर सकते, नहीं आ सकते। तब जवाब आता है। 

" कोशिश तो कर सकते हो ?"

मैं कहती हूँ ठीक है  - कोशिश करूंगी  , I will try ...........

इसी आशा पर कि क्या पता…… बेमन से सही काम हो ही जाए, काश…………

और तब भीतर बैठा मेरा झूठ मुझे आँखें दिखाने लगता है। बदले में मैं मुस्कुरा देतीं हूँ। एक फीकी और सहमी हुई मुस्कान।  

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...