Thursday, June 26, 2014

सुनिए कहते सुनते बातों -बातों में प्यार हो जाएगा


ओए !

क्या है ?

तेरा सर है। 

फिर वही बाहियात भाषा। 

बहुत लोग बैठे हैं यहाँ पर। तू ही क्यों बोला ?

तूने मुझ से ही तो कहा था । 

तेरा नाम लिया मैंने ?.... फिर ?

तू नाम लेती ही कब है मेरा, आज ले ज़रा, प्यार से…… 

अच्छा बता, क्या नाम है तेरा ?

तेरा सर है।  ( दोनों हंस देते हैं )

तुम दोनों फिर शुरू हो गए ? नालायकों काम कर लो।  ( मैनेजर की घुड़की पर दोनों अपने -अपने काउंटर पर सर झुका कर व्यस्त हो गए। लोग कनखियों से एक -दूसरे की शक्ल देख कर मुस्कुराने लगे )

ये बैंक ने एक्स्ट्रा फैसिलिटी दी है हमे। शीतल और संजू तुम दोनों की नोक -झोंक से ही ये बैंक आबाद है। ( मैंने कहा )

बोरियत दूर करने का साधन है ये संजू। 

शादी कब कर रहे हो ? ( फिर पूछती हूँ )

किससे .... इससे? .... हुंह्ह 

अरे नहीं कर रही है ? मैं तो तेरे इंतज़ार में आधा हुआ जाता हूँ …बात करती है। 

तू ..............मिस करता है मुझे ?

हाँ करता हूँ।  क्या करेगी ? ……राशनिंग है क्या इस पर ?

लंच ब्रेक में …डो नट्स खिला दे न …… 

ओए....


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