Friday, October 4, 2013

इत्ती सी हँसी इत्ती सी खुशी इत्ता सा टुकड़ा चाँद का


" हाय जॉली कैसा है ?" वो अति उत्त्साह से मेरी बगल में रखी कुर्सी पर बैठ जाता है। 

"आप मुझे पहचानते हो ?"

"गुडनेस तुम भूल गया हमको ?"

"पहचान कब हुई थी ?"

"ओह गॉड सेव मी.…….याद करो दो साल पहले वो हैबिटेट सेंटर में…….प्ले देखते वक्त इंट्रो हुआ फिर उधर - किधर कॉफी बी पिया था। "

" सुनो अव्वल तो मैं कॉफी पसंद ही नहीं करती फिर किसी के साथ पहली मुलाक़ात में तो बिलकुल भी नहीं। अब आगे बोलो……."

"नावु इट्स टू मच.... माय डालिंग……तुम वो बुक दिया था हमको ' बागवत गीता "

" डिअर सर तुम भगवत गीता पढ़े होते न तो आज कहीं ज्ञान बाँट रहे होते यहाँ मुझे पहचानने की मशक्कत नहीं कर रहे होते "

"अबी ये क्या है ?" वो श्यामल मलयाली बाबू भवों को सिकोड़ कर बुद्धी पर खूब जोर डालते हैं। 

"आह नो……. सॉरी मैडम……कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग हुआ शायद "

" काहे का मैडम…… वो इससे पहले क्या बोला था फिर से बोलना तो ज़रा " अब जितनी जोर से वो झेंपा और हंस पड़ा था उतनी ही जोर से मैं भी हंस देती हूँ। 

उसे जाता हुआ देख कर सोचती हूँ ……कुछ पल की हँसी किसी चेहरे पर दे जाना……ये ज़िंदगी इन जैसे चंद प्यारे लोगों की वजह से ही खूबसूरत है। 

"है न ?"

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