Saturday, August 31, 2013

अजीब दास्ताँ है ये


कहते हैं दो इंसान अगर ढाई कदम भी साथ चलें तो वो दोस्त बन जाते हैं. 

"किसने कहा ?"

" ओहो हमारे शास्त्रों में भी लिखा है"

"तुमने कब पढ़े शास्त्र ?"

"हम तो साथ जरा भी नहीं चले, एक दूसरे को देखा तक नहीं। परन्तु ढाई शब्दों का आदान-प्रदान तो किया ही होगा न ?"

" ना वो भी तो नहीं हुआ "

" तो क्या फिर हम दोस्त भी नहीं हुए ?"

"अब जो शास्त्र तुमने पढ़े हैं उसके अनुसार तो नहीं हुए "

"ह्म्म्म्म चलो कोई बात नहीं"

कुछ कदम तुम चलो / कुछ कदम हम चलेंगे 
दुनियादारी सीख कर कुछ शब्द बुनेंगे 


"फिर ढाई कदम साथ भी चल लेंगे"

"तब तक ?"

" क्या.... तुम अपना काम करो, हम अपना काम करेंगे "


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