Tuesday, May 14, 2013

जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला


कभी गौर करें तो सब अलग- अलग तरह से लड़ते हैं। भाई-बहिन, पति -पत्नी, मित्र, बच्चे, स्त्रियाँ, पुरुष, बड़ी गाड़ी वाले और छोटी गाड़ी वाले, ...सबके अलग- अलग तेवर। मुझे सबसे अच्छी लड़ाई लगती है ..... प्रेमी जोड़ों की।

चेहरों से भाव टपका जाता है ....कि बस एक-दूसरे को गले लगा लो, परन्तु उनके बीच का अहम् इतना बड़ा होता है कि ऐसा होने नहीं देता। 

वो अपनी बाईक पेट्रोल भरवाते वाहनों की लाइन में लगा देता है, लड़की झट से नीचे उतरती है। चेहरे से स्टॉल का नक़ाब हटाती है और बोलना शुरू कर देती है। चेहरे पर फुल ओन अकड़, गुस्सा ......पर थी सुन्दर, उसके मासूम चेहरे पर गुस्सा फ़ब भी नहीं रहा था। 

" तू कल था कहाँ, मुझे ये बता दे पहले....न मिस कॉल का आंसर न एस एम् एस का ......पागल समझ रखा है......"

" अरे यार तू समझती क्यूँ नहीं .......वो दोस्त लोग ........"

" तो तू रह न उनके ही साथ, मैंने बुलाया था तुझे .....तूने ही मिन्नत की थी न रचना से .....अब मुझे कोई बात नहीं करनी तुझसे ......सब ख़तम ....आज ही सब ख़तम करूंगी तुझ से .....तू  देख ...."

"ओए अकड़ मत ..ठीक है  .....तू भी फोन नहीं उठाती है कई बार ....अपने आप को ....."

" चुप रहा कर तू जरा ...समझा ......अब मम्मी - पापा के सामने तेरा फोन उठाऊँ मैं .... हैं .....बात करूँ मैं तुझसे ....पागल दिखती हूँ क्या ...."

इस बीच पेट्रोल भर जाता है ....वो फिर नकाब और सन गोंगल से चेहरा ढक लेती है। अकड़ कर लड़के के पीछे थोडा दूरी बना कर बैठ जाती है। लड़का बाईक पर जोर का ब्रेक लगाता है, झटके से लड़की  उससे सट जाती है। गुस्से से उसकी पीठ पर प्यार की एक धौल जमाती हुई कहती है -" पागल है क्या?" हेलमेट के नीचे से भी लड़के का ठहाका साफ़ सुनाई पड़ता है। 

उनके जाने के बाद आस-पास, गाड़ी के अन्दर बैठे और बाहर खड़े सभी लोग एक दूसरे को देख मुस्कुरातें हैं। गोया की उनके प्यार पर सभी को प्यार आया हो। ये प्रेमी-प्रेमिका का रोल अदा करते लोग भी ना ....कहीं भी शुरू हो जाते हैं .....

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