Thursday, April 25, 2013

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं


"कोमरेड देखा तुमने, गुलमोहर फिर खिलने लगे हैं "

"हाँ देखा और उसमें रचे-बसे तुम्हें भी देखा "

"शाम को मिलो तो......उसी अपने वाले गुलमोहर के पेड़ के नीचे बैठ कर ढेर सारी बातें करेंगे। तुमसे अच्छे से बातें किये हुए भी बहुत दिन हो गए " 

"तुम सुनती ही कहाँ हो, मेरे पास भी कितना कुछ है तुमसे कहने को "

"हाँ आज दिल खोल कर ढेर सारी बातें करेंगे और झरते हुए गुलमोहर को भी देखेंगे। आओगे न? "

शाम को दोनों गुलमोहर के नीचे एक दूसरे का हाथ थामे चुपचाप देर तक बैठे रहे। खामोशी से एक दूसरे से ढेर सारी बातें भी करते रहे.........



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