Saturday, March 30, 2013

इसलिए चुप रहतें हैं


उसने कहा -"दोस्त तुम कितने खुश रहते हो, हमेशा हँसते - खिलखिलाते ....तुम्हारे चेहरे पर दमकती प्रसन्नता देख कर सभी प्रसन्न हो जाते हैं। तुम इसी तरह हमेशा खुश रहा करो।" और मैं खुश हो जाती हूँ। 

तुमने कहा -" सुन रहे हो मुझे तुम्हारी ये झूठी हंसी बिलकुल अच्छी नहीं लगती। बहने दो नदी की तरह उसे जो भीतर जमने लगा है हिमनद सा "  

"मैं कभी उदास नहीं होती हूँ "

 "उदासी को दबा लेने का हुनर कोई तुमसे सीखे"

".................."

संजीदा हो कर सोचने लगती हूँ , हम तीनों में कौन सही है और कौन गलत ......

ये लोग भी न अजीब होते हैं, उलझा देते हैं .....

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...