Wednesday, August 15, 2012

थोड़ा है थोड़े की जरुरत है



"बडी …… चलो बैडमिन्टन खेलतें हैं "

"नहीं कामरेड इस खेल में मैं हमेशा तुमसे हार जाती हूँ। चलो चैस खेलतें हैं"

"उसमें हमेशा जीत जाती हो इसलिए? वैरी स्मार्ट "

"क्या पता आज सच में ही जीत जाऊं "

होंठों पर फैली जासूसी मुस्कुराहट के साथ कहती है।

"आज सच में जीत जाऊं से तुम्हारा क्या मतलब है? यू लूजर"

वो भवों में बल डालता हुआ शंकित होकर पूछता है।

"चलो खेलतें हैं , फिर देखेंगे"

शुरू में थोड़ा सा खेल को उलझाता हुआ वह फिर अन्य दिनों की ही तरह अंत में उससे जान बूझ कर फिर हार जाता है।

"तो तुम मुझे सच में कभी जीतने ही नहीं दोगे, है ना कामरेड?"

 वो ढेर सारा प्यार छलकाती हुई आँखों से, कामरेड से पूछती है और जीत कर भी उससे फिर हार जाती है।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...