Wednesday, July 22, 2009

वीकएंड


















वीकेंड फिर आ गया। मैं बहुत खुश हो जाती  हूँ। शुक्रवार का दिन तो अक्सर बड़ा ही खुशगवार गुजरता है। जैन बाबू मुस्करा कर कहते हैं। " एवरी फ्राइडे यू लुक चिरपिंग एंड ब्यूटीफुल माय गर्ल "

मैं चहक कर कहतीं हूँ। " ओह यस सर ईट्स वीकेंड अगैन। "

हर बार की तरह इस बार भी सोचती हूँ । खूब देर तक सोऊँगी । रिलैक्स ,घूमना ,पिक्चर , क्लब .....और खुश हो कर ...होंठों पर मुस्कराहट लिए मनपसंद गाने की धुन गुनगुनाती फाईल्स चैक करने लगती हूँ ।


शुक्रवार की शाम अन्य दिनों की अपेक्षा ज़ल्दी आ जाती है मारिया केबिन में आकर जोर से टेबल पर हाथ मार कर ऊँची आवाज में कहती है - " ओए , आज घर जाने का इरादा नहीं है क्या ,यहीं रहेगी ?....वैसे भी घर में कहाँ आराम है तुझे ...तू तो यहीं रह ले और देख कितना शानदार वीकएंड होता है तेरा"

 ताना मारती है वो । उसे पता है .. हर बार की तरह सोमवार को थका और उतरा हुआ मुँह लेकर मैं फिर वही गाना गाऊँगी- " ओह गौड ये वीकएंड क्यूँ आता है ?" ...

" चल मैं नीचे हूँ कैंटीन में , शरद के साथ एक कप चाय पीती हूँ । तू झटपट काम निपटा कर आ " कहकर वो तूफानी गति से चली जाती है ....

मैं सोचने लगी मारिया ही अच्छी है। शादी हुई नहीं या की नहीं ..पूछने पर तरह-तरह की कहानियाँ सुना देती है तो पूछना ही छोड़ दिया। क्या ज़िन्दगी है उसकी ...मस्ती भरी। कोई जिम्मेदारी नहीं ,कोई कहने सुनने वाला नहीं , किसी की कोई चिंता नहीं। कितना एन्जॉय करती है वो लाइफ को .....फ़िर सहसा याद आ जाता है बच्चों का मुझे गले लगा कर प्यार जताना , विनीत का प्यार- मनुहार , माँ बाबूजी का स्नेह व आशीर्वाद। फिर भावुक हो अपने भाग्य को सराहने लगती हूँ ।

फाईल समेटकर घड़ी की तरफ देखा तो ८ बज चुके थे ...झटपट नीचे उतरते हुए मारिया को फ़ोन मिलाया।

" मैरी चाय हो गयी तो आ ज़ल्दी "

 मारिया मेरी अति प्रिय सहेली है। कई वर्षों से हर दुख- सुख की साझीदार। दोनों गप-शप करते हुए चल रही थीं
" देखना मैरी...... कल खूब सोउँगी ,फिर पार्ल्रर , मूवी वगैरह और मंडे को तरोताजा "

 उसने बिना कुछ बोले मेरी तरफ अपनेपन से देखा और सिर्फ मुस्कुरा दी ... फिर मेरे सर पर हाथ रखकर बालों को सहला दिया।

घर पहुँचते ही बच्चे एलान कर देते हैं - "सुबह ७ बजे स्टेडियम पहुँचना है। पहले स्वीमिंग फिर टी टी की कोचिंग है ...११ बजे तक आयेंगे ...मॉम स्नैक्स पैक कर देना फ्रेंड्स के लिए भी प्लीईईज़ "

मैं उम्मीद से विनीत की तरफ देखती हूँ यदि वो बच्चों को सुबह छोड़ आयें तो .....वो प्यार से मेरे कन्धों पर दोनों हाथ रखकर पुचकार देता है। "बहुत थक गया हूँ डीअर वर्क लोड बहुत था आज ...तुम छोड़ आना , लेकर मैं आऊँगा ना ...... प्लीईईज़। "


इस प्लीज़ शब्द से कई बार चिढ़ होने लगती है मुझे। किसने किया होगा इसको इजाद। मुझे उससे भी शिकायत है ....बड़बड़ाती हूँ मैं।

" हनी कल बढ़िया लंच बनाना सब मिलकर साथ बैठकर खायेंगे ...फिर ३ बजे से मेरा गोल्फ का टूर्नामेंट है...... माँ बाबु जी सत्संग में जायेंगे। उन्हें मैं ड्राप करता हुआ चला जाउँगा " 

सहसा कुछ याद करता हुआ विनीत फिर बोला। " शाम को निखिल खाने पर आएगा सपरिवार.....तुम्हारे हाथ के खाने का तो जवाब ही नहीं "  वो मुस्कुराकर कहता है।

"और सन्डे को......." सहसा वह मेरी तरफ़ देखने लगता है ।

"अरे तुम कुछ बोलती क्यों नहीं, तुम्हें कही जाना है तो बताओ ?"

वो मेरी चुप्पी पर प्रश्नचिन्ह लगा देता है। मैं दिल में उठे तूफ़ान को शान्त करने की कोशिश में कुछ देर और चुप रहती हूँ .....सोचती हूँ।

" जब सभी के सारे प्रोग्राम तय है ......तो फिर मेरे साथ ये फोर्मेलिटी क्यों ?"

"कुछ नहीं यूँ ही " .....कहकर मैं फिर मौन रहना ही उचित समझती हूँ ......

सब कुछ समेटने में १२ बज चुके थे । सुबह ६ बजे का अलार्म लगाकर सोने का नाटक करती हूँ ....नींद आज भी साथ नहीं देती ...उस निशब्द रात्रि में सोचने लगती हूँ .....शायद मारिया ही अच्छी है।

तभी इन सभी बातों से बेखबर मारिया का खनकता हुआ एस एम् एस आ जाता है ......

"Jani enjoy this weekend hmm...Bindass ..मिलते हैं मंडे को Hugs"


Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...