उन्मुक्त होने की चाह में विचलित हो जाती हूँ
उस घेरे से जो तुम खींच देते हो
मेरे चारों तरफ
अनजाने में
तब
खोलती हूँ मैं
घबरा कर उस खिड़की को
जो उस पेड़ की तरफ खुलती है
जिसके घोसले में चुगा रही होतीं हैं चिड़िया
अपने डैनों में छिपाकर अपने नन्हे बच्चों को दाना