अवसर मिलते ही हिन्दुस्तान का प्रेम उसे इधर खींच लाता है...." यू नो डैड इंडिया में हर दिन मेले जैसा होता है, कलरफुल ....."
यहाँ सड़क के कोने पर लगी बेंच पर बैठना उसे बेहद पसंद है कुछ घंटे आते-जाते लोगों को देखती वो यूँ ही बिता दिया करती है. वो किस मकसद से यहाँ आकार बैठती है .....दूर दूर तक सोच के पंख फ़ैलाने पर भी कोई सिरा हाथ नहीं आता ...शायद सोसिअली मिसफिट और अन्तेर्मुखी होने की वजह से,बस दुनिया की चहल-पहल देखना उसे अच्छा लगता है ...वो भी बिना किसी हस्तक्षेप के .....
सड़क पर कभी कोई माँ अपने जिद्दी बच्चे को बहला रही होती है तो कहीं कोई सजीला पती अपनी नई ब्याहता को खुश करने की कोशिश करता नज़र आता है .....कुछ महिलाएं मिलकर जोर-जोर से शोर सा मचाती हुयी सेल पर की गई साड़ियों की खरीदारी पर चहक रही होती है ...तो कहीं कोई सब्जियां और फलों का मोल तोल कर रहा होता है कहीं स्ट्रोबेरी और पोप कॉर्न खरीदते-खाते प्रेमी बनने की चाहत रखते बालक बालिकाएं ..तो कहीं कोई नव युवक माथे पर शिकन और चिंता की लकीरें लिए अपनी बुजुर्ग और बीमार जिम्मेदारियों को निभा रहा होता हैं ... वहीं कहीं पर खिलखिलाता हुआ प्रेमी युगल जीवन के सभी तनावों को भूलकर मस्ती में दीखता है ....
इन सभी को देख-समझ रही थी ... अचानक उस दिन की रोटी कमाने की कोशिश करती एक आवाज़ उसे अपने पास में सुनायी दी ...
" आज तो बहुत ठंडा है ...मैडम आज तो एक ग्लास चाय ले लो ..५ रूपये की है ...बहुत अच्छी चाय बनता हूँ..तुम पीकर तो देखो .....फिर अगली बार जब आओगे तो फिर से मेरी ही चाय पीने को कहोगे ...."
गर्दन घुमा कर उसकी तरफ देखती है .....१२ - १४ वर्ष का सावला, छोटी कद काठी का लड़का हाथ में चाय की केतली और डिस्पोसेबल ग्लास लेकर खड़ा था ...उम्र से छोटा पर रोजी रोटी कमाने की फ़िक्र से कुछ बड़ा नज़र आता था
जेब से पैसे निकाल कर उसे देती है और गर्म चाय का ग्लास हाथ में लेकर हैरान होकर उस से पूछती है - " तो क्या तुम अक्सर मुझे यहाँ पर देखते हो?"
" हाँ " वो सपाट चेहरा रखते हुवे ही बोला
" जब तुम नहीं आती ना तो सब एक दूसरे से पूछते हैं तब ...."आज मैडम नहीं आई क्या ? ऐसा ? "
जिस रंग बिरंगी दुनिया को कोतुहल की नज़रों से देखने वो यहाँ चली आती है ...उसी में कुछ रंग वो स्वयं भी भर देती है ....वो भी यहाँ के लोगों के लिए एक विषय है ......चुप चाप बैठे रहने वाले भी दुनिया की नज़रों से नहीं बच पाते ... सुनकर वो थोडा हैरान होती है ...
कुछ और जान पाने का लोभ रखती हुई पूछ लेती है ..
" क्या नाम है तुम्हारा ?"
" पानू "
"स्कूल में क्या नाम है वो बताओ "
" स्कूल तो कब्बी गया नहीं "
" हम्म्म्म...सब लोग कौन पूछते हैं मेरे बारे में ?"
" वो किताब की दूकान के अन्दर खड़े लोग,वो आइसक्रीम की रेड़ी वाला,वो जो नीचे भुट्टा बेच रहा है ना वो भी पूछता है ..."
"वो मूंगफली वाला राजू है ना वो भी अपनी मूंगफली तुमको बेचना चाहता है ...पर कहता है -"वो बहुत गुस्से वाली दिखती है ....डांट कर भगा देगी तो ..."
एक तरफ इशारा करके कहता है -"वो मफलर वाले साब कह रहे थे की आप की शादी नहीं हुई ..अकेली है तो इधर मन लगाने के लिए आ जाती है .."
" उस दिन घोड़ा गाड़ी चलाने वाला माधव कह रहा था की तुम्हारा आदमी तुमको शराब पीकर मारता होगा ..तब्बी इधर आ गई...ऐसा होता है क्या ?"
पानू की सरल बातें उसका मन बहला रही थीं......
" लछिमा है ना मेरी बड़ी बहन उसने भी तुमको एक दिन देखा था कह रही थी अंग्रेजो जैसा कोट पहन रखा है ...उसे हिन्दी नहीं आती है ...फिर वो हमारी बात कैसे समझेगी ...?"
" वो अपने हाथ से मोज़े बुनती है ...सुन्दर मोज़े ..तुमको चाहिए तो मुझे बता दो ...मैं कहूँगा लछिमा से... तुमको हिन्दी बोलनी आती है .... उसके बुने हुवे मोज़े ४० रुपये के होते हैं "
" किताब की दूकान वाले कहते हैं...तुम्हारे हाथ में किताब होती है ना की तुम कहानी लिखने वाले मैडम हो ? "
" उसकी दूकान में जो मासाब आते हैं वो उन पढ़े लिखे लोगों से कह रहे थे की तुम दूसरे देश के जासूस हो,आतंकवादियों के जासूस ....तुम्हारी पुलिस में शिकायत कर देनी चाहिए ....फिर हो सकता है सरकार उनको इनाम दे दे "
उसकी इस बात पर वो बहुत जोर से हंस पड़ती है ....लड़का अपनी बातों से उसे हँसते देख कर खुश हो जाता है और फिर से अपनी एक चाय और उसे बेच देना चाहता है ....
" मैडम अब तो बहुत देर हो गयी अब एक गर्म चाय और दे दूँ ...? "
