Friday, May 15, 2009
Sunday, May 10, 2009
लहरों से उलझता जीवन - २
हर बार रेपिड मे प्रवेश करते ही लगता था कि इस बार बोट जरूर पलट जायेगी । पानी का तीव्र वेग उसे आगे से इतनी ऊपर उठा देता था की जल्दी से गाइड के आदेशानुसार एक ज्यादा बजन वाले व्यक्ति को आगे से बोट पर झुक कर उस पर दबाव डालना होता था।
तब तक एक बहुत बड़ी लहर बहुत ठंडे पानी के साथ हमें पूरी तरह सराबोर कर देती थी। फ़िर हँसते ,खिलखिलाते हम आगे बढ जाते थे।
दूसरे रेपिड में प्रवेश करने से पहले कुछ देर राहत की साँस लेते थे। फिर वातावरण शान्त , मौन हो उठता था।
उस दिन गंगा का बहाव बहुत तेज था व छुट्टियाँ शुरू हो जाने से बहुत से लोग रिवर राफ्टिंग करने के लिए आए हुए थे। रंग बिरंगी बोट्स पानी में मेले का सा आभास देती थी।
अब दूसरा रेपिड थोडी दूरी पर अपने प्रचंड वेग के साथ शोर मचाता हुआ सा दिखने लगा। लेकिन गाइड ने कुछ देर के लिए बोट्स वहीं रुकवा दी थी बोला -
" सामने देखिये वो सारी बोट्स ऐक -ऐक करके रेपिड में प्रवेश करेंगी। उनके क्लियर होने पर ही हम आगे बढ़ेंगे। "
फिर थोड़ा हँस कर बोला।
"यानी पानी में ट्रेफिक जाम हो गया है ..रुकना पड़ेगा । " उसकी इस बात पर हम सब भी मुस्करा पड़े थे।
इस तरह ४ बड़े रेपिड व कुछ छोटे रेपिड्स के बीच से गुजरे। अब तक तो सारी दुनिया हिल चुकी थी। पर इसका अपना निराला अनुभव था ।
अब बोट एक शान्त जगह पर आकर रुकी। जिसे डाईविग पॉइंट कहतें हैं । बोट से उतर कर ऊपर पहाड़ी पर चढ़ना था। जो चढ़ते समय बहुत आसान जान पड़ा । ऊपर टॉप पर से फ़िर नीचे कूदना था । नीचे नजर डाली तो लगा इरादा बदल कर शराफत से नीचे उतर जायें। लेकिन मन नही माना। फ़िर तो सभी २ , ३ बार कूदे। जब पानी में बहुत गहरे पहुँच जाते थे तो लगता था जैसे अब ऊपर कब पहुँचेंगे । दिल की धड़कन बढाता शानदार एक और अनुभव था ।
वापस बोट में बैठ कर थोड़ा और आगे गए । अब सभी रेपिड्स समाप्त हो चुके थे व गंगा थोड़ा शान्त हो चुकी थी । यहाँ गाइड ने कहा।
" यहाँ कोई खतरा नही है सो सभी पानी में कूद जाएँ और ठंडे पानी का आनंद लें ।"
और जो थोड़ा डर रहा है वो बोट से बँधी रस्सी में अपने पैर फसां लें। लगभग सभी बोट्स के लोग पानी से नीचे उतर कर मज़े से तैर रहे थे ।
कैमरा ले जाने की अनुमति नही थी , क्यूँकि पानी सभी कुछ भीगा दे रहा था। मैंने गाइड के वाटर प्रूफ़ बैग में अपना मोबाईल कैमरा डाला और कुछ तस्वीरें लेने को कहा था।
तभी सामने राम झूला नज़र आने लगा जो हमारी इस रेफ्टिंग का अन्तिम पड़ाव था । इस तरह रोमांचित रिवर रेफ्टिंग की यात्रा ...उत्तेजित ,उत्त्साहित करती रही। शोर मचाते ,गाते ,ठण्ड से कंपकंपाते ये पानी का सफर समाप्त हो गया। वहाँ से हम सभी तरोताजा होने भोजन के लिए अपने कमरों की ओर बढे।
कुछ देर के बाद अदरख की गर्म चाय के साथ एक बार फ़िर हम सभी ने गंगा की लहरों का सफर यादों में दोहराते हुए जी भर कर जिया......
Friday, May 8, 2009
लहरों से उलझता जीवन -1
गंगा के जल से पवित्र होता ऋषिकेश मुझे अति प्रिय है । सूकून और शान्ति प्रदान करता हुआ। २ अप्रैल को एक बार फ़िर मन हुआ गंगा की लहरों से उलझा जाय। फिर रवाना हुए ऋषिकेश की ओर । वैसे तो वहां जाने का ये मेरा तीसरा अनुभव था। लेकिन उत्त्साह व रोमांच वही पहली बार वाला।
३ अप्रैल सुबह दस बजे की बुकिंग थी । एक जीप हम सभी को व हमारी बोट को लेकर शिवपुरी नामक स्थान पर पहुँची । यहाँ से शुरू होता है गंगा की शान्त व तीव्र लहरों के साथ आत्मसात होने का रोमांचक सफर।
गंगा की अति तीव्र लहरों को रेपिड्स कहते हैं। ऐडमंड हिलेरी ने अपनी रेफ्टिंग यात्रा के दौरान इनके आकार की वजह से इन तीव्र लहरों को अलग अलग नाम दिए थे। जैसे गोल्फ कोर्स , रोलर कोस्टर आदि ।
गाइड सूरज ने हम सभी को सेफ्टी जैकेट्स व हेलमेट दिए पहनने को दिए। और साथ में बताए बहुत सारे डू एंड डोंट्स ....कब,कहाँ तेज करना है कहाँ पर रोकना है वगैरह, और सबसे खतरनाक बात कही कि यदि बोट पलट जाए तो सभी ने अपने आप को व दूसरों को कैसे बचाना है ।
बोट में हवा भर कर उसे भली भॉति चेक किया गया। फिर सभी की जैकेट्स कसी व हेल्मट पहनने को कहा । एक -एक करके सभी बोट मे सवार हुए। साथ मे मिले दो गाइड। हाथ मे पतवार थामे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे बहुत बड़े मुकाम पर जा रहे हों ...
गंगा का शाँत ,स्वच्छ पानी मन को आलौकिक शीतलता प्रदान कर रहा था ।मैं सोचने लगी -
" कैसे इतनी विशाल गंगा को शिवजी ने अपनी जटा में धारण किया होगा ..."
तभी गाइड की तेज आवाज पर चौंकी।
" पहला बड़ा रेपिड आने वाला है सभी तैयार रहें व आदेश ध्यान से सुने "
थोड़ी घबराहट व रोमांच हो आया, पतवार पर हाथ कस गए .. इशारे पर सामने देखा तो रोंगटे खड़े हो गए । दहाड़ती हुई सी पूरे वेग के साथ हहराती हुई गंगा काफी ऊपर उठ कर एक विशालकाय लहर के रूप में थी । मुझे तो लगा बस इतना ही जीवन शेष था शायद......वैसे तो ऐसा हर बार लगता है इन रेपिड्स में प्रवेश करते ही। लेकिन उनसे टकराते ही उमंग व जोश दुगुना हो जाता था और साहस बढ़ जाता था। साथ ही बढता है चुनौतियों से लड़ते हुए जिंदा रहने की जिजीविषा भी ।
रेपिड्स के बीच से गुजरते हैं सारा पानी तीव्र गति से आकर हमें पूरी तरह भिगा देता है। लगता है जैसे सागर के बीच कहीं समां गए हों १ - २ मिनट का अद्भुत अनुभव होता है। शानदार जीवन भर ना भुला पाने वाला।
गाइड के आदेश फॉरवर्ड पर ...तेजी से पतवार चलाते ,चिल्लाते , हँसते ,रोमांचित व उत्साहित होते रेपिड के बीच में प्रवेश कर जातें हैं .....
शेष जल्दी ही.....
Monday, May 4, 2009
मेरे मन का इन्द्रधनुष वो

मैंने भी सपने बुने थे
इन्द्रधनुष के रंगों से
कुछ हुए पूरे
कुछ रहे अधूरे
जीवन पथ पर चलते चलते
अकस्मात एक दिन
रिमझिम बौछारों ने
मिटटी की सोंधी खुशबू ने
नभ से आँखमिचोली करते
सूरज के एक कतरे ने
निर्मित किया
उस इन्द्रधनुष को
उस मेरे मन के इन्द्रधनुष को
अपलक देख उस दृश्य को
खो गई मधुर स्मृतियों में
अनजानी दुनिया में
अनजानी राहों पर
खो जाना अक्सर
मेरी आदत में शुमार हैं
कभी .....
प्रकृति के नयनाभिराम सौन्दर्य में
कभी ...
वक्त की अठखेलियों में
स्मृति टूटी तो पाया
विलुप्त होते इन्द्रधनुष को
बदलते हुए .....
फुहारों को बौछारों में
और तृप्त होकर
अधरों पर मंदस्मिता लिए
नए रंगों की तलाश में
जीवन पथ पर चलते चले
Subscribe to:
Posts (Atom)

.jpg)